Twin Pregnancy After IVF

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था: वे जोखिम जो आपको जानने चाहिए

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था कई दंपतियों के लिए खुशी और उम्मीद का एक बड़ा पल हो सकती है। लंबे समय तक फर्टिलिटी उपचार के बाद जब अल्ट्रासाउंड में दो शिशुओं की धड़कन दिखाई देती है, तो यह अनुभव बेहद भावुक हो सकता है। हालांकि, जुड़वां गर्भावस्था में मां और दोनों शिशुओं की अतिरिक्त निगरानी की जरूरत होती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि IVF से हुई जुड़वां गर्भावस्था में कोई समस्या होना तय है। बहुत-सी महिलाओं की ट्विन प्रेग्नेंसी स्वस्थ तरीके से आगे बढ़ती है और वे स्वस्थ बच्चों को जन्म देती हैं। लेकिन दो शिशुओं को गर्भ में विकसित करने के कारण कुछ जटिलताओं का जोखिम एकल गर्भावस्था की तुलना में अधिक हो सकता है।

समय से पहले प्रसव, हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह, एनीमिया और शिशुओं के विकास में अंतर जैसी स्थितियों पर डॉक्टर विशेष ध्यान दे सकते हैं।

इस लेख में हम IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था के जोखिम, जरूरी जांच, चेतावनी के संकेत और गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था क्या है?

जब IVF उपचार के बाद गर्भ में दो शिशु विकसित होते हैं, तो इसे जुड़वां गर्भावस्था या Twin Pregnancy कहा जाता है।

यह अलग-अलग परिस्थितियों में हो सकती है:

  • दो ट्रांसफर किए गए भ्रूण गर्भाशय में सफलतापूर्वक इम्प्लांट हो जाएं।
  • एक भ्रूण दो भागों में विभाजित होकर समान जुड़वां बच्चों का रूप ले ले।
  • IVF प्रक्रिया के दौरान एक से अधिक भ्रूण ट्रांसफर किए गए हों और उनमें से दो विकसित हो जाएं।

यही कारण है कि IVF में भ्रूणों की संख्या और चयन महत्वपूर्ण होता है। आधुनिक IVF उपचार में उपयुक्त मरीजों के लिए Single Embryo Transfer को प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इससे जुड़वां या उससे अधिक बच्चों वाली गर्भावस्था का जोखिम कम किया जा सकता है।

क्या IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था हाई रिस्क होती है?

जुड़वां गर्भावस्था को आमतौर पर एकल गर्भावस्था की तुलना में अधिक निगरानी वाली गर्भावस्था माना जाता है।

इसके पीछे मुख्य कारण है कि शरीर को एक के बजाय दो शिशुओं की जरूरतों को पूरा करना पड़ता है। इसके अलावा, ट्विन प्रेग्नेंसी में कुछ गर्भावस्था संबंधी और नवजात संबंधी जटिलताओं की संभावना बढ़ जाती है।

संभावित जोखिमों में शामिल हैं:

  • समय से पहले प्रसव
  • प्रीक्लेम्पसिया
  • गर्भावधि मधुमेह
  • आयरन की कमी और एनीमिया
  • शिशुओं के विकास में अंतर
  • कम जन्म वजन
  • प्लेसेंटा से जुड़ी जटिलताएं
  • प्रसव के दौरान या बाद में अधिक रक्तस्राव

हालांकि, हर महिला का जोखिम एक जैसा नहीं होता। गर्भवती महिला की उम्र, स्वास्थ्य, जुड़वां बच्चों का प्रकार, प्लेसेंटा की स्थिति और गर्भावस्था की प्रगति जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।

1. समय से पहले प्रसव का जोखिम

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था में सबसे महत्वपूर्ण चिंताओं में से एक समय से पहले प्रसव यानी Preterm Birth है।

सामान्य रूप से 37 सप्ताह से पहले होने वाले प्रसव को प्रीटर्म डिलीवरी कहा जाता है। जुड़वां गर्भावस्था में समय से पहले प्रसव की संभावना एकल गर्भावस्था की तुलना में काफी अधिक होती है।

समय से पहले जन्म लेने वाले शिशुओं को कुछ अतिरिक्त स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे:

  • सांस लेने में परेशानी
  • दूध पीने या फीडिंग में कठिनाई
  • शरीर का तापमान बनाए रखने में परेशानी
  • ब्लड शुगर में बदलाव
  • संक्रमण का बढ़ा हुआ जोखिम
  • विशेष नवजात देखभाल की आवश्यकता

इसी वजह से डॉक्टर गर्भावस्था के दौरान शिशुओं के विकास और मां के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी कर सकते हैं।

2. प्रीक्लेम्पसिया और हाई ब्लड प्रेशर

प्रीक्लेम्पसिया गर्भावस्था की एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर के साथ शरीर के कुछ अंगों पर असर पड़ सकता है।

जुड़वां गर्भावस्था में प्रीक्लेम्पसिया का जोखिम एकल गर्भावस्था की तुलना में अधिक हो सकता है।

संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • तेज या लगातार सिरदर्द
  • धुंधला दिखाई देना या दृष्टि में बदलाव
  • अचानक चेहरे या हाथ-पैरों में सूजन
  • पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
  • सांस लेने में परेशानी
  • गर्भावस्था के बाद के चरण में मतली या उल्टी
  • बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर

ध्यान रखें कि प्रीक्लेम्पसिया हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ शुरू नहीं होता। इसलिए नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप और ब्लड प्रेशर की जांच बेहद महत्वपूर्ण है।

3. गर्भावधि मधुमेह का खतरा

जुड़वां गर्भावस्था में Gestational Diabetes का जोखिम भी बढ़ सकता है।

गर्भावधि मधुमेह वह स्थिति है जिसमें गर्भावस्था के दौरान ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है।

डॉक्टर आपकी स्थिति और जोखिम कारकों के आधार पर ग्लूकोज टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।

यदि गर्भावधि मधुमेह का पता चलता है, तो इसे नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर सुझाव दे सकते हैं:

  • संतुलित डाइट
  • सुरक्षित शारीरिक गतिविधि
  • ब्लड शुगर की नियमित जांच
  • आवश्यक होने पर दवाएं
  • कुछ मामलों में इंसुलिन

गर्भावधि मधुमेह का निदान होने का अर्थ यह नहीं है कि गर्भावस्था में निश्चित रूप से गंभीर समस्या होगी। समय पर पहचान और सही प्रबंधन महत्वपूर्ण है।

4. एनीमिया और पोषण की अधिक आवश्यकता

दो शिशुओं के विकास के कारण शरीर की पोषण संबंधी जरूरतें बढ़ जाती हैं।

विशेष रूप से आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया जुड़वां गर्भावस्था में चिंता का विषय हो सकता है।

एनीमिया के संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • अत्यधिक थकान
  • कमजोरी
  • चक्कर आना
  • सांस फूलना
  • सिरदर्द
  • त्वचा का पीला पड़ना

डॉक्टर जरूरत के अनुसार हीमोग्लोबिन और आयरन की जांच कर सकते हैं।

प्रेग्नेंसी में कोई भी आयरन या अन्य सप्लीमेंट अपनी तरफ से अधिक मात्रा में शुरू करने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

5. दोनों शिशुओं के विकास में अंतर

जुड़वां बच्चों का विकास हमेशा बिल्कुल समान गति से नहीं होता।

कभी-कभी दोनों शिशुओं के वजन या विकास में महत्वपूर्ण अंतर दिखाई दे सकता है। इसे Growth Discordance कहा जाता है।

अल्ट्रासाउंड के माध्यम से डॉक्टर देख सकते हैं:

  • दोनों शिशुओं का अनुमानित वजन
  • समय के साथ उनका विकास
  • एम्नियोटिक फ्लूइड
  • प्लेसेंटा की स्थिति
  • आवश्यक होने पर ब्लड फ्लो
  • दोनों शिशुओं के विकास में अंतर

हर छोटा अंतर गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन यदि अंतर बढ़ रहा हो या डॉक्टर को अन्य चिंताएं दिखाई दें, तो अधिक बार निगरानी की आवश्यकता हो सकती है।

6. प्लेसेंटा और अम्नियोटिक सैक से जुड़ी समस्याएं

जुड़वां गर्भावस्था में यह जानना बहुत महत्वपूर्ण है कि दोनों शिशु प्लेसेंटा और अम्नियोटिक सैक को साझा करते हैं या नहीं।

जुड़वां गर्भावस्था के कुछ सामान्य प्रकार हैं:

Dichorionic Diamniotic Twins

इस स्थिति में दोनों शिशुओं के अलग-अलग प्लेसेंटा और अलग-अलग अम्नियोटिक सैक होते हैं।

Monochorionic Diamniotic Twins

दोनों शिशु एक ही प्लेसेंटा साझा करते हैं, लेकिन उनके अम्नियोटिक सैक अलग होते हैं।

Monochorionic Monoamniotic Twins

दोनों शिशु एक ही प्लेसेंटा और एक ही अम्नियोटिक सैक साझा करते हैं।

जिन जुड़वां बच्चों का प्लेसेंटा साझा होता है, उनमें कुछ विशेष जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इसलिए डॉक्टर ऐसे मामलों में अधिक नियमित अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं।

7. Twin-to-Twin Transfusion Syndrome

Twin-to-Twin Transfusion Syndrome (TTTS) एक ऐसी जटिलता है जो विशेष रूप से उन जुड़वां गर्भावस्थाओं में हो सकती है जिनमें दोनों बच्चे एक ही प्लेसेंटा साझा करते हैं।

इस स्थिति में प्लेसेंटा के अंदर रक्त प्रवाह दोनों शिशुओं के बीच असंतुलित हो सकता है।

यह हर ट्विन प्रेग्नेंसी में नहीं होता। लेकिन यदि दोनों बच्चे एक ही प्लेसेंटा साझा करते हैं, तो डॉक्टर नियमित अल्ट्रासाउंड के माध्यम से इसकी निगरानी कर सकते हैं।

यदि आपकी रिपोर्ट में Monochorionic Twins लिखा है, तो अपने डॉक्टर से पूछें कि आपको कितनी बार अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता होगी।

8. कम जन्म वजन

जुड़वां बच्चों में Low Birth Weight का जोखिम भी अधिक हो सकता है।

इसका एक कारण यह है कि ट्विन प्रेग्नेंसी में समय से पहले प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।

कम जन्म वजन और समय से पहले जन्म एक ही चीज नहीं हैं, लेकिन दोनों एक साथ हो सकते हैं।

इसीलिए गर्भावस्था के दौरान नियमित ग्रोथ स्कैन यह देखने में मदद करते हैं कि दोनों बच्चे उचित गति से बढ़ रहे हैं या नहीं।

9. सी-सेक्शन की संभावना

जुड़वां गर्भावस्था में प्रसव का तरीका कई बातों पर निर्भर करता है।

डॉक्टर निम्न कारकों को ध्यान में रख सकते हैं:

  • दोनों बच्चों की पोजीशन
  • गर्भावस्था के कितने सप्ताह पूरे हुए हैं
  • बच्चों का विकास और अनुमानित वजन
  • प्लेसेंटा की स्थिति
  • मां का स्वास्थ्य
  • पहले कोई सी-सेक्शन या गर्भाशय संबंधी सर्जरी हुई है या नहीं
  • गर्भावस्था में किसी प्रकार की जटिलता

इसलिए सिर्फ जुड़वां बच्चे होने का मतलब यह नहीं है कि सी-सेक्शन अनिवार्य होगा। प्रसव का निर्णय आपकी व्यक्तिगत स्थिति के आधार पर किया जाता है।

10. प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव

जुड़वां गर्भावस्था में गर्भाशय को दो शिशुओं के लिए अधिक फैलना पड़ता है।

कुछ परिस्थितियों में इससे प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव यानी Postpartum Hemorrhage का जोखिम बढ़ सकता है।

डिलीवरी के दौरान मेडिकल टीम इस संभावित जोखिम को ध्यान में रखती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत उपचार उपलब्ध कराती है।

11. Vanishing Twin Syndrome

कभी-कभी शुरुआती अल्ट्रासाउंड में दो भ्रूण दिखाई देते हैं, लेकिन उनमें से एक का विकास रुक जाता है।

इसे Vanishing Twin Syndrome कहा जाता है।

ऐसी स्थिति विशेष रूप से IVF के बाद भावनात्मक रूप से कठिन हो सकती है, क्योंकि दंपति लंबे समय तक फर्टिलिटी उपचार के बाद गर्भधारण तक पहुंचे होते हैं।

यदि ऐसा कुछ होता है, तो आपका डॉक्टर बताएगा कि इसका दूसरे शिशु की गर्भावस्था पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और आगे किस प्रकार की निगरानी की जरूरत होगी।

क्या IVF के कारण जुड़वां गर्भावस्था अधिक जोखिम वाली होती है?

यहां IVF और जुड़वां गर्भावस्था के बीच अंतर समझना जरूरी है।

IVF अपने आप में यह नहीं बताता कि गर्भावस्था में निश्चित रूप से जटिलता होगी। मुख्य अतिरिक्त जोखिम अक्सर Multiple Pregnancy यानी एक से अधिक शिशुओं वाली गर्भावस्था से जुड़ा होता है।

यदि IVF में एक से अधिक भ्रूण ट्रांसफर किए जाते हैं, तो जुड़वां गर्भावस्था की संभावना बढ़ सकती है।

वहीं, एक ही भ्रूण ट्रांसफर करने के बाद भी कभी-कभी वह भ्रूण विभाजित होकर समान जुड़वां बच्चों में विकसित हो सकता है।

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था की निगरानी कैसे की जाती है?

हर गर्भावस्था के लिए मॉनिटरिंग प्लान अलग हो सकता है। डॉक्टर निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं:

शुरुआती अल्ट्रासाउंड

इससे पता चल सकता है:

  • कितने भ्रूण विकसित हो रहे हैं
  • गर्भावस्था सही जगह पर है या नहीं
  • भ्रूण की धड़कन
  • गर्भावस्था की उम्र
  • दोनों बच्चे प्लेसेंटा साझा करते हैं या नहीं

नियमित ब्लड प्रेशर जांच

यह हाई ब्लड प्रेशर और प्रीक्लेम्पसिया की पहचान में मदद कर सकती है।

ब्लड टेस्ट

जरूरत के अनुसार डॉक्टर जांच कर सकते हैं:

  • हीमोग्लोबिन
  • आयरन
  • ब्लड शुगर
  • अन्य आवश्यक गर्भावस्था संबंधी पैरामीटर

नियमित अल्ट्रासाउंड और ग्रोथ स्कैन

इनका उद्देश्य दोनों बच्चों के विकास, अम्नियोटिक फ्लूइड और अन्य महत्वपूर्ण संकेतकों पर नजर रखना होता है।

विशेषज्ञ की देखभाल

कुछ महिलाओं को Maternal-Fetal Medicine Specialist या हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी विशेषज्ञ की देखरेख की आवश्यकता हो सकती है।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था के दौरान निम्न लक्षण दिखाई देने पर अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें:

  • योनि से रक्तस्राव
  • पानी जैसा तरल पदार्थ निकलना
  • नियमित या दर्दनाक संकुचन
  • तेज पेट या पेल्विक दर्द
  • तेज या लगातार सिरदर्द
  • आंखों के सामने धुंधला दिखाई देना
  • अचानक बहुत अधिक सूजन
  • सांस लेने में परेशानी
  • सीने में दर्द
  • बेहोशी या अत्यधिक चक्कर
  • गर्भावस्था के बाद के चरण में बच्चे की गतिविधियों में कमी या बदलाव
  • बुखार या संक्रमण के संकेत

गंभीर लक्षण होने पर अगली अपॉइंटमेंट का इंतजार न करें।

क्या IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था के जोखिम कम किए जा सकते हैं?

हर जटिलता को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता। हालांकि, सही IVF रणनीति और नियमित प्रेग्नेंसी केयर से कुछ जोखिमों को कम करने और समस्याओं का समय पर पता लगाने में मदद मिल सकती है।

IVF में Single Embryo Transfer जुड़वां या उससे अधिक बच्चों वाली गर्भावस्था की संभावना कम करने की प्रमुख रणनीतियों में से एक है।

लेकिन एक भ्रूण ट्रांसफर करने के बाद भी समान जुड़वां बच्चों की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती।

जुड़वां गर्भावस्था के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

अगर आप पहले से जुड़वां बच्चों के साथ गर्भवती हैं, तो घबराने के बजाय नियमित मेडिकल केयर पर ध्यान देना सबसे महत्वपूर्ण है।

आपको:

  • सभी प्रेग्नेंसी अपॉइंटमेंट समय पर लेने चाहिए।
  • डॉक्टर द्वारा सुझाए गए अल्ट्रासाउंड करवाने चाहिए।
  • प्रिस्क्राइब किए गए प्रीनेटल विटामिन और सप्लीमेंट लेने चाहिए।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार लेना चाहिए।
  • शारीरिक गतिविधि के संबंध में डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
  • जरूरत पड़ने पर ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की निगरानी करनी चाहिए।
  • किसी भी असामान्य लक्षण की जानकारी डॉक्टर को देनी चाहिए।
  • यह पता करना चाहिए कि दोनों बच्चे एक प्लेसेंटा साझा करते हैं या नहीं।
  • डिलीवरी प्लान के बारे में समय रहते डॉक्टर से चर्चा करनी चाहिए।

डॉक्टर से कौन से सवाल पूछें?

यदि आपकी IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था है, तो डॉक्टर से ये सवाल पूछना उपयोगी हो सकता है:

  1. क्या मेरे जुड़वां बच्चे समान हैं या अलग-अलग?
  2. क्या दोनों बच्चे एक ही प्लेसेंटा साझा कर रहे हैं?
  3. क्या दोनों के अम्नियोटिक सैक अलग हैं?
  4. मुझे कितनी बार अल्ट्रासाउंड करवाना होगा?
  5. दोनों बच्चों के विकास की निगरानी कैसे की जाएगी?
  6. क्या मुझे प्रीक्लेम्पसिया का अधिक जोखिम है?
  7. मुझे Gestational Diabetes की जांच कब करवानी होगी?
  8. किन लक्षणों में तुरंत अस्पताल या डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
  9. डिलीवरी की योजना कब बनानी शुरू करनी चाहिए?
  10. क्या मुझे Maternal-Fetal Medicine Specialist से मिलना चाहिए?

निष्कर्ष

IVF के बाद जुड़वां गर्भावस्था खुशी का अनुभव हो सकती है, लेकिन इसे एकल गर्भावस्था की तुलना में अधिक निगरानी की आवश्यकता हो सकती है।

समय से पहले प्रसव, प्रीक्लेम्पसिया, गर्भावधि मधुमेह, एनीमिया, शिशुओं के विकास में अंतर और प्लेसेंटा से जुड़ी समस्याएं ऐसे जोखिम हैं जिन पर डॉक्टर विशेष ध्यान दे सकते हैं।

हर जुड़वां गर्भावस्था अलग होती है। बच्चों के प्लेसेंटा और अम्नियोटिक सैक की स्थिति, मां का स्वास्थ्य, गर्भावस्था की अवधि और अन्य व्यक्तिगत कारक आपके वास्तविक जोखिम को प्रभावित करते हैं।

यदि आप IVF के बाद जुड़वां बच्चों के साथ गर्भवती हैं, तो नियमित प्रेग्नेंसी चेकअप, समय पर अल्ट्रासाउंड और डॉक्टर की सलाह का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी असामान्य या गंभीर लक्षण को नजरअंदाज न करें।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि IVF से हुई ट्विन प्रेग्नेंसी का परिणाम केवल IVF के आधार पर निर्धारित नहीं किया जा सकता। आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार आपका स्त्री रोग विशेषज्ञ, फर्टिलिटी विशेषज्ञ या Maternal-Fetal Medicine Specialist सबसे उचित सलाह दे सकता है।

यह लेख केवल शैक्षणिक और सामान्य जानकारी के लिए है। यह व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। गर्भावस्था से संबंधित किसी भी चिंता या लक्षण के लिए अपने योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

 Visit Vrinda Fertility

Take the next step toward your parenthood journey with expert fertility care, advanced treatments, and personalized treatment plans.

Visit Vrinda Fertility today and consult experienced fertility specialists to understand your fertility needs and explore the right treatment options for you.

Visit/Book Your Consultation → Delhi / Noida / Dehradun .

A Chance for Assured Pregnancy

Table of Contents

Scroll to Top
logo

Get in touch

YOUR FIRST CHOICE IN FERTILITY AND WOMEN’S HEALTH